शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

चौवालीस निकम्मे और भ्रांत नेतृत्व

चौवालीस निकम्मे और भ्रांत नेतृत्व

कांग्रेस के कुल चौवालीस सांसद हैं इनमें से कोई १५ -२० तो हाईकमान के चापलूस हैं। शेष उच्चक्के गलियों में काम ढूंढ रहें हैं ,इन्हें कहीं मिट्टी पड़ी नज़र आ जाती है तो ये फ़ौरन कहतें  हैं देखो यहां कित्ती मिट्टी पड़ी हुई है और प्रधानमन्त्री स्वच्छता अभियान की बात करते हैं।

कांग्रेस द्वारा छोड़े गए चापलूस जो अब तक पुराने दस्तावेज़ लहरा रहे थे पिटपिटा कर धौलपुर महल से बाहर निकल आएं हैं। ये लोग जो भी मुद्दा हाथ में लेते हैं वह बूमराँग  करता है सूटबूट की सरकार कहने वाला शख़्श सूटकेस शब्द सुनकर बौखलाया हुआ है। भूल गया सूटबूट की सरकार कहना। उधर ढींगरा साहब ने ज़मीन हड़पु दामाद वाड्रा नेहरू की फ़ाइल खोल दी है।

भ्रांत नेतृत्व कुछ न कुछ करता हुआ दिखना चाहता है। संसद का वर्षाकालीन सत्र अभी दूर है। तब तक ये निकम्मे क्या करें कांग्रेस का संकट ये है।   मुद्दा कांग्रेस के  पास कोई है नहीं काम कोई है नहीं सत्ता से बे -दखल इन लोगों को। इसलिए कभी सुषमा के पीछे पड़ते हैं कभी स्वराज के।

कभी गुजरात का भूत निकाल लेते हैं जो मोदी का तो कुछ नहीं बिगाड़ सका अब कांग्रेस के कंधे पे चढ़ गया है। कई चैनलिये भी इनके साथ हो लिए हैं जो लोगों की राय पूछ रहे हैं -गुजरात का भूत मोदी का पिंड छोड़ेगा या नहीं।

भारत की न्यायपालिका मोदी को बे -दाग घोषित कर चुकी है। दगैल कांग्रेस अपने दामन की चिंता करे। मोदी की मार्फ़त  तो ओबामा भी भारत आकर देश का मान बढ़ा गए।

सोनिया नेहरू को अगर कोई काम नहीं है तो विदेश ही घूम आएं।   क्यों बिला वजह शेष बचे कांग्रेसियों की फजीहत करवा रहीं हैं।

कांग्रेस के कुल चौवालीस सांसद हैं इनमें से कोई १५ -२० तो हाईकमान के चापलूस हैं। शेष उच्चक्के गलियों में काम ढूंढ रहें हैं ,इन्हें कहीं मिट्टी पड़ी नज़र आ जाती है तो ये फ़ौरन कहतें  हैं देखो यहां कित्ती मिट्टी पड़ी हुई है और प्रधानमन्त्री स्वच्छता अभियान की बात करते हैं।

कांग्रेस द्वारा छोड़े गए चापलूस जो अब तक पुराने दस्तावेज़ लहरा रहे थे पिटपिटा कर धौलपुर महल से बाहर निकल आएं हैं। ये लोग जो भी मुद्दा हाथ में लेते हैं वह बूमराँग  करता है सूटबूट की सरकार कहने वाला शख़्श सूटकेस शब्द सुनकर बौखलाया हुआ है। भूल गया सूटबूट की सरकार कहना। उधर ढींगरा साहब ने ज़मीन हड़पु दामाद वाड्रा नेहरू की फ़ाइल खोल दी है।

भ्रांत नेतृत्व कुछ न कुछ करता हुआ दिखना चाहता है। संसद का वर्षाकालीन सत्र अभी दूर है। तब तक ये निकम्मे क्या करें कांग्रेस का संकट ये है।   मुद्दा कांग्रेस के  पास कोई है नहीं काम कोई है नहीं सत्ता से बे -दखल इन लोगों को। इसलिए कभी सुषमा के पीछे पड़ते हैं कभी स्वराज के।

कभी गुजरात का भूत निकाल लेते हैं जो मोदी का तो कुछ नहीं बिगाड़ सका अब कांग्रेस के कंधे पे चढ़ गया है। कई चैनलिये भी इनके साथ हो लिए हैं जो लोगों की राय पूछ रहे हैं -गुजरात का भूत मोदी का पिंड छोड़ेगा या नहीं।

भारत की न्यायपालिका मोदी को बे -दाग घोषित कर चुकी है। दगैल कांग्रेस अपने दामन की चिंता करे। मोदी की मार्फ़त  तो ओबामा भी भारत आकर देश का मान बढ़ा गए।

सोनिया नेहरू को अगर कोई काम नहीं है तो विदेश ही घूम आएं।   क्यों बिला वजह शेष बचे कांग्रेसियों की फजीहत करवा रहीं हैं।  

1 टिप्पणी:

  1. सर जी, कांग्रेस से तो मुझे कोई उम्मीद है नहीं। हालांकि व्यापम मामले की जांच ऐसे होनी चाहिए कि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। इससे कांग्रेस को इस मुद्दे पर जो बढ़त मिलती दिख रही है वो खत्म हो जाएगी।

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